भारत में एक समान हलाल सर्टिफिकेट सिस्टम की आवश्यकता क्यों

भारत में एक समान हलाल सर्टिफिकेट सिस्टम की आवश्यकता क्यों?

(हलाल और हराम में फर्क करने में क्या है चुनौतियां और विश्व के बाजार में हलाल वस्तुओं की बढ़ती हिस्सेदारी पर आधारित यह लेख लेखक के निजी विचार हैं।लेखक संतोष चौधरी जशपुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

इस्लामिक कानून में या कहें तो पवित्र किताब क़ुरान में अनुयायियों को अनिवार्य रूप से विधि (हलाल) और निषिद्ध (हराम) के बीच अंतर करना बताया गया है। भारतीय मुसलमान भी इस इस्लामिक परंपरा को विधिवत मानते हैं और अनुसरण करते हैं। भारत में, देश की मुस्लिम आबादी के बीच हलाल-प्रमाणित उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद भारत में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है।
भारत में हलाल को प्रमाणित करने के लिए मौजूदा सिस्टम नाकाफ़ी है और इसमें मानकीकरण (Standardization) का अभाव दीखता है।जिसके कारण हर उपभोक्ताओं (Customer) के बीच प्रमाणित हलाल एवं हराम वस्तुओं के बीच अंतर ढूंढने में भ्रम पैदा कर सकता है।

अरबी में, हलाल शब्द का अर्थ “मुनासिफ़ या वैध” है। खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में, हलाल विशेष रूप से मांस से जुड़ा हुआ है और इस्लाम का पालन करने वाले लोगों के आहार से संबंधित है। इसके विपरीत, अरबी ‘हराम’ शब्द का अर्थ हिंदी में “निषिद्ध या विधि विरुध्द” है। कुरान के अनुसार, मुसलमानों के लिए कई सामान प्रतिबंधित हैं। हलाल सर्टिफिकेट भोजन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व के अलावा, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने का एक साधन भी है। भोजन के उत्पादन और उससे जुड़े धार्मिक महत्व के आसपास के सख्त दिशानिर्देश और नियम अक्सर लोगों को खाद्य जनित बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।

हाल के दिनों में यह देखने को मिला है कि छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों जैसे रायपुर, दुर्ग, भिलाई में बड़े फ़ूड चेन जैसे कि डोमिनोज़, पिज़्ज़ा हट,केएफसी, सबवे इत्यादि अपने पांव पसार रहे हैं और सभी हलाल मीट परोसने का दावा करते हैं। छोटे शहरों जैसे कि जशपुर, अम्बिकापुर, रायगढ़ इत्यादि में ये बड़े फ़ूड चेन तो नही पर छोटे छोटे कई होटल – ढाबा एवं रेस्टोरेंट हैं जो कि मांसाहारी भोजन परोसते हैं और दावा भी करते हैं कि भोजन हलाल है परंतु उनके पास कोई मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र नही होता। इसमें मुस्लिम अनुयायियों के लिए ये फर्क कर पाना मुश्किल होता है कि सच में भोजन हलाल है या उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। छोटे ठेले वाले चाइनीज़ फ़ूड के नाम चिल्ली चिकन,मोमोज जैसे खाद्य पदार्थ बेचते हैं और हलाल के बारे में कुछ नहीं बताते।

भारत में लगभग सभी प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों को FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) प्रमाणन प्राप्त है, लेकिन यह संगठन हलाल प्रमाणीकरण(Certificate) प्रदान नहीं करता है। हालांकि, भारत में हलाल प्रमाणन के लिए वर्तमान प्रणाली खंडित है अर्थात कोई एक संस्था नहीं है। कई अलग-अलग निजी संस्था हलाल प्रमाणन सेवाएं प्रदान करते हैं। इसने प्रमाणन प्रक्रिया की स्थिरता और विश्वसनीयता के साथ-साथ हलाल लेबल के शोषण और दुरुपयोग की संभावना के बारे में कुछ चिंताओं को जन्म दिया है।
साफ कहा जाए तो हलाल प्रमाणन प्रक्रिया से जुड़े नियमों को लागू करने के लिए कोई उचित तंत्र नहीं है।

एक और मुद्दा जो यहां उठता है, वह है हलाल प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ली जाने वाली अवैध राशि यानी घूस। स्रोतों के अनुसार हलाल प्रमाण पत्र प्राप्त करने में आमतौर पर लगभग 50,000 रुपये खर्च होते हैं। हम यह भी नहीं जानते कि उस पैसे का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। यह पैसे हलाल मापदंडों का पालन करने के लिए दिए जा रहे हैं या बतौर घूस केवल प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ? इन सभी मुद्दों को हल करने का सबसे प्रभावी तरीका यह हो सकता है कि मानक हलाल प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक अधिकृत संस्थान हो। एक समान हलाल प्रमाणन प्रणाली होने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि हलाल लेबल वाले सभी उत्पाद समान मानकों को पूरा करते हैं और इस्लामी कानून के अनुसार उत्पादित किए गए हैं। इससे होगा यह कि उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जाने वाले उत्पादों की प्रामाणिकता में अधिक विश्वास पैदा करेगा और हलाल प्रमाणन प्रक्रिया में विश्वास को बढ़ावा देगा। इसके माध्यम से अर्जित धन का उपयोग अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों की उन्नति के लिए किया जा सकता है।

हलाल खाद्य बाजार के आंकड़े

2022 में, वैश्विक हलाल खाद्य बाजार का मूल्य 2,221.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इंटरनेशनल मार्केट एनालिसिस रिसर्च एंड कंसल्टिंग ग्रुप (IMARC Group) का अनुमान है कि 2028 तक यह बाजार दोगुने के करीब यानी 4177.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो 2023 से 2028 तक 10.8% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है। एक एकीकृत हलाल प्रमाणन प्रणाली होगी तो बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों को हलाल-प्रमाणित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देकर भारतीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

कई देशों को खाद्य उत्पादों के आयात की अनुमति देने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्राधिकरण से हलाल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। भारत में एक एकीकृत और मानकीकृत हलाल प्रमाणन प्रणाली बनाये जाने से विश्व के हलाल-बाजार में देश की प्रतिस्पर्धा शक्ति बढ़ेगी। एक समान हलाल प्रमाणन प्रणाली न केवल हलाल प्रमाणन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निरंतरता को बढ़ावा देगी बल्कि उपभोक्ता के विश्वास को बढ़ाने में मदद करेगी।

भारत में हलाल सर्टिफिकेट गैर सरकारी

इससे पहले ये जान लें कि हलाल सर्टीफिकेट इस बात की गारंटी देता है कि यह खाद्य पदार्थ मुस्लिम विधि और बिना किसी मिलावट के शुद्ध रूप से तैयार किया गया है।दिलचस्प यह कि ऐसी गारंटी देने वाली भारत में कोई सरकारी संस्थान नहीं है। हलाल सर्टिफिकेट सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जमायत उलेमा ए महाराष्ट्र और जमायत उलेमा ए हिन्द हलाल ट्रस्ट ऐसे सर्टिफिकेट जारी करते हैं।विश्व के मुस्लिम देशों में हर प्रकार की खाद्य,सौंदर्य व अन्य उत्पादों को बेचने के लिए हलाल सर्टिफिकेट बहुत जरूरी है। पतंजलि हो,अमूल हो,केएफसी हो सभी ने हलाल सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद निर्यात कर मुनाफ़ा कमाना शुरू किया।इसलिए अब भारत में सरकार हलाल सर्टिफिकेट जारी करने की मांग बढ़ रही है।